उत्तराखंड की देवभूमि एक बार फिर अपनी अद्भुत आध्यात्मिक धरोहर को लेकर चर्चा में है। हिमालय की गोद में स्थित पिथौरागढ़ जिले का प्रसिद्ध ओम पर्वत श्रद्धालुओं और प्रकृति प्रेमियों के लिए आस्था और आश्चर्य का अनूठा संगम बना हुआ है।
करीब 5900 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह पर्वत अपनी प्राकृतिक बनावट के कारण विशेष महत्व रखता है। यहां बर्फ की परतों से स्वयं ‘ॐ’ का स्पष्ट आकार उभरता है, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं। विशेष बात यह है कि यह आकृति किसी मानव द्वारा नहीं बनाई गई, बल्कि पूरी तरह प्राकृतिक है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ‘ॐ’ ध्वनि सृष्टि की उत्पत्ति का प्रतीक मानी जाती है। शिव पुराण में भी इसका उल्लेख मिलता है। इसी कारण ओम पर्वत को भगवान शिव की तपोस्थली और निवास स्थान माना जाता है।
यह पवित्र स्थल कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर स्थित है और नाभीढांग शिविर से इसके दर्शन होते हैं। यहां पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को पिथौरागढ़ से धारचूला होते हुए इनर लाइन परमिट लेना अनिवार्य होता है।
हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं। यह यात्रा केवल दर्शन नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और आध्यात्मिक अनुभूति का माध्यम मानी जाती है।



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