देहरादून। उत्तराखंड में स्कूलों की छुट्टियों की व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने की संभावना है। राज्य सरकार ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन अवकाश में कटौती करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। प्रस्ताव के अनुसार वर्तमान में लागू 48 दिनों की लंबी छुट्टियों को घटाकर 32 दिन किया जा सकता है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक इस बदलाव के तहत कम की जाने वाली 16 दिनों की छुट्टियों के बदले शिक्षकों को 10 दिन का उपार्जित अवकाश (Earned Leave – EL) देने की सिफारिश की गई है। शासन स्तर पर इस प्रस्ताव के सभी पहलुओं का अध्ययन किया जा रहा है और वित्त विभाग से भी इस पर परामर्श लिया गया है।
शिक्षा विभाग के सचिव रविनाथ रमन के अनुसार वर्तमान अवकाश प्रणाली में संशोधन से जुड़े सभी पहलुओं की समीक्षा की जा रही है। वित्त विभाग की ओर से कुछ आपत्तियां भी दर्ज की गई थीं, जिनका विस्तृत जवाब भेज दिया गया है। सरकार की अंतिम मंजूरी मिलते ही नई व्यवस्था लागू की जा सकती है।
शिक्षकों की लंबे समय से रही है मांग
उत्तराखंड में अन्य सरकारी कर्मचारियों को जहां सालाना 31 दिन का अर्जित अवकाश मिलता है, वहीं शिक्षकों को केवल एक ईएल और तीन विशेष अवकाश ही मिलते हैं। ऐसे में शिक्षक लंबे समय से गर्मी और सर्दी की लंबी छुट्टियों के स्थान पर नियमित अर्जित अवकाश देने की मांग करते रहे हैं।
राजकीय शिक्षक संघ ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया है। संघ के प्रदेश महामंत्री रमेश पैन्यूली, पूर्व महामंत्री डॉ. सोहन सिंह माजिला और उपाध्यक्ष राजकुमार चौधरी ने कहा कि यदि सरकार लंबी छुट्टियों में कटौती कर शिक्षकों को ईएल की सुविधा देती है तो यह एक सकारात्मक कदम होगा।
नए टाइम-टेबल पर भी विवाद
इसी बीच हाल ही में राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए नए स्कूल टाइम-टेबल का शिक्षक संगठनों ने विरोध भी किया है। नए टाइम-टेबल के अनुसार गर्मियों में स्कूल सुबह 7:45 बजे और सर्दियों में 9:45 बजे खुलेंगे।
शिक्षकों का कहना है कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां बेहद चुनौतीपूर्ण हैं। पहाड़ी इलाकों में कई बच्चे जंगलों और नदी-नालों को पार कर कठिन रास्तों से स्कूल पहुंचते हैं। ऐसे में सुबह जल्दी स्कूल खुलने से बच्चों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
सरकार का कहना है कि सभी सुझावों और आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए अंतिम निर्णय लिया जाएगा।



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