देहरादून।
उत्तराखंड सरकार ने सरकारी विकास परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू कर दी है। नई व्यवस्था के तहत अब राज्य के शहरी क्षेत्रों में जमीन का बाजार मूल्य का दोगुना और ग्रामीण क्षेत्रों में चार गुना तक मुआवजा दिया जाएगा।
राज्य सरकार का मानना है कि इससे सड़क, बांध, औद्योगिक परियोजनाओं और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए भूमि उपलब्ध कराना आसान होगा। नई प्रक्रिया में लंबी और जटिल अधिग्रहण प्रक्रिया के बजाय आपसी सहमति के आधार पर सीधे जमीन खरीदने की व्यवस्था लागू की गई है।
राजस्व विभाग के अनुसार, यदि भू-स्वामी सहमत होते हैं तो जिला प्रशासन सीधे भूमि खरीद सकेगा, जिससे परियोजनाओं में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा। अभी तक भूमि अर्जन अधिनियम-2013 के तहत जमीन अधिग्रहण में कई बार दो वर्ष या उससे अधिक समय लग जाता था।
डीएम के खाते में जमा होगा प्रशासनिक शुल्क
नई SOP के अनुसार भूमि अधिग्रहण करने वाली सरकारी संस्था को कुल मूल्य का 1 प्रतिशत या अधिकतम 50 हजार रुपये प्रशासनिक शुल्क के रूप में जिलाधिकारी (DM) के खाते में जमा करना होगा।
रजिस्ट्री और स्टांप शुल्क का पूरा खर्च संबंधित विभाग द्वारा वहन किया जाएगा।
राजस्व सचिव सुरेंद्र नारायण पांडे के अनुसार, नई व्यवस्था से सरकारी परियोजनाओं को गति मिलेगी और भू-स्वामियों को पारदर्शी तरीके से उचित मुआवजा मिल सकेगा।
60% सहमति जरूरी
भूमि अधिग्रहण के लिए प्रभावित भू-स्वामियों में से कम से कम 60 प्रतिशत की सहमति आवश्यक होगी। समिति यह भी सुनिश्चित करेगी कि जमीन पर किसी प्रकार का कानूनी विवाद या ऋण लंबित न हो।
अपील का प्रावधान
यदि कोई भू-स्वामी समिति के निर्णय से संतुष्ट नहीं होता है तो वह 30 दिनों के भीतर मंडलायुक्त के पास अपील कर सकता है। मंडलायुक्त का निर्णय अंतिम माना जाएगा।
यदि आपसी सहमति नहीं बनती है, तो सरकार भूमि अर्जन अधिनियम-2013 के तहत अनिवार्य भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया लागू कर सकती है।
किसानों के लिए अतिरिक्त लाभ
नई SOP में किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए कई अतिरिक्त प्रावधान किए गए हैं।
भूमि देने के बाद किसान भूमिहीन हो जाता है तो 25% अतिरिक्त मुआवजा
50% से अधिक भूमि जाने पर 12% अतिरिक्त राशि
फसल, पेड़ और भवन जैसी परिसंपत्तियों का अलग से मूल्यांकन
व्यवसाय बदलने की स्थिति में उसका खर्च भी मुआवजे में शामिल
दो स्तर पर बनेगी समितियां
भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए दो स्तर पर समितियां गठित की गई हैं।
10 करोड़ रुपये तक के प्रोजेक्ट — अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) की अध्यक्षता में समिति
10 करोड़ से अधिक के प्रोजेक्ट — जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समिति
सरकार का कहना है कि इस नई SOP से राज्य में विकास परियोजनाओं को गति मिलेगी और भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी और तेज होगी।



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