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post authorAdmin 14 Mar 2026

चार या पांच गोलगप्पे? हरियाणा के महम में 12 साल तक कोर्ट में चला विवाद, आखिरकार सभी आरोपी बरी.

चंडीगढ़/रोहतक:
हरियाणा के रोहतक जिले में गोलगप्पों की संख्या को लेकर शुरू हुआ मामूली विवाद आखिरकार 12 साल बाद अदालत में समाप्त हो गया। महम कोर्ट ने इस मामले में पर्याप्त सबूत न मिलने के कारण तत्कालीन थाना प्रभारी, चौकी इंचार्ज, एएसआई सहित कुल नौ आरोपियों को बरी कर दिया।

यह घटना 21 मई 2013 को रोहतक जिले के महम के राजीव चौक पर हुई थी। उस दिन कुछ युवक गोलगप्पे खाने के लिए एक रेहड़ी पर पहुंचे। रेहड़ी संचालक सूबे सिंह ने एक प्लेट में चार गोलगप्पे दिए।

इस पर महम निवासी अनिल और उसके साथियों ने आपत्ति जताई। उनका कहना था कि सामान्यतः पांच रुपये में पांच गोलगप्पे दिए जाते हैं, जबकि यहां केवल चार दिए जा रहे हैं। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों में कहासुनी हो गई और विवाद बढ़ते-बढ़ते मारपीट तक पहुंच गया।

घटना के बाद रेहड़ी संचालक की शिकायत पर महम पुलिस ने अनिल और उसके साथियों के खिलाफ मारपीट का मामला दर्ज किया। इसके जवाब में अनिल ने भी पुलिस कर्मचारियों और अन्य लोगों पर मारपीट का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई।

बाद में अनिल के पिता सत्यवान, जो उस समय उत्तर हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम में फोरमैन थे, ने 10 अक्टूबर 2013 को महम कोर्ट में शिकायत दायर की। इसमें तत्कालीन थाना प्रभारी कुलदीप बेनीवाल, चौकी प्रभारी रामनिवास, एएसआई धर्मबीर, एएसआई सुभाष, रेहड़ी संचालक सूबे सिंह और पड़ोसी रेहड़ी संचालक अजय नेहरा सहित कई लोगों को आरोपी बनाया गया।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में कुल 15 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। पहले चरण में रेहड़ी संचालक के साथ मारपीट के मामले में अनिल को तीन साल की सजा सुनाई गई थी, लेकिन बाद में रोहतक कोर्ट ने अपील पर उसे बरी कर दिया। इसके बाद दोनों मामलों की संयुक्त सुनवाई शुरू हुई।

करीब 12 वर्षों तक चले इस मामले में अब अदालत ने फैसला सुनाते हुए दोनों पक्षों से जुड़े सभी नौ आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।

गौरतलब है कि उस समय के थाना प्रभारी कुलदीप बेनीवाल अब डीएसपी के पद पर कैथल जिले के गुहला में तैनात हैं। वहीं तत्कालीन चौकी प्रभारी रामनिवास और एएसआई धर्मबीर सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि एएसआई सुभाष अभी भी सेवा में हैं।

हालांकि अनिल के पिता सत्यवान ने संकेत दिए हैं कि वे इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं

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                                  सांकेतिक फोटो। iStock