kotha
post authorAdmin 14 Mar 2026

मिडिल ईस्ट तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित निकला भारत का एलपीजी जहाज ‘शिवालिक’.

मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। भारत का एलपीजी (रसोई गैस) ले जाने वाला जहाज ‘शिवालिक’ शुक्रवार रात रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सुरक्षित पार कर गया।

जहाजों की आवाजाही पर नज़र रखने वाली वैश्विक ट्रैकिंग साइट MarineTraffic के अनुसार यह एलपीजी कैरियर जहाज 7 मार्च को कतर से अमेरिका के लिए रवाना हुआ था। हाल के दिनों में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों के लिए जोखिम बढ़ गया था।

भारत की सरकारी कंपनी का जहाज

‘शिवालिक’ भारत की सरकारी शिपिंग कंपनी Shipping Corporation of India का जहाज है। यह जहाज करीब 50,000 टन से अधिक एलपीजी ले जाने की क्षमता रखता है। ऐसे में युद्ध जैसे हालात के बीच इसका सुरक्षित रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार करना भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस क्षेत्र में समुद्री मार्ग बाधित होते हैं तो दुनिया भर में तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

भारत में एलपीजी की कोई कमी नहीं

इस बीच भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में फिलहाल एलपीजी की कोई कमी नहीं है। हालांकि वैश्विक तनाव की खबरों के बाद कुछ जगहों पर लोग घबराहट में अतिरिक्त सिलेंडर बुक कर रहे हैं।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि अफवाहों के कारण लोग अनावश्यक बुकिंग और जमाखोरी करने लगे हैं। उन्होंने बताया कि भारत में घरेलू एलपीजी की औसत डिलीवरी अवधि करीब ढाई दिन है और सप्लाई पूरी तरह सामान्य है।

डीएसी सिस्टम से रोकथाम

एलपीजी के दुरुपयोग और डायवर्जन को रोकने के लिए सरकार ने Delivery Authentication Code (DAC) प्रणाली लागू की है। इसके तहत सिलेंडर प्राप्त करते समय ग्राहक को डिलीवरी एजेंट को एक विशेष कोड देना होता है।

इसके अलावा अस्थायी उपाय के तौर पर एलपीजी बुकिंग के बीच न्यूनतम अंतराल 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है, ताकि जमाखोरी रोकी जा सके।

होर्मुज को लेकर बढ़ा तनाव

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फिलहाल वैश्विक तनाव का केंद्र बना हुआ है। अमेरिका और ईरान के बीच टकराव के कारण इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा पर लगातार नजर रखी जा रही है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने फारस की खाड़ी में स्थित खार्ग द्वीप पर मौजूद ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। यह द्वीप ईरान के तेल निर्यात के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि देश के लगभग 80 से 90 प्रतिशत कच्चे तेल का निर्यात इसी मार्ग से होता है

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।

मिडिल ईस्ट तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित निकला भारत का एलपीजी जहाज ‘शिवालिक’