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post authorAdmin 28 Jan 2026

आर्य वैद्यशाला के शताब्दी समारोह में पीएम मोदी: बोले– आयुर्वेद भारत की जीवंत चिकित्सा विरासत, आर्य वैद्यशाला का योगदान ऐतिहासिक.

केरल स्थित आर्य वैद्यशाला के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने आयुर्वेद को संरक्षित करने, सहेजने और वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाने में आर्य वैद्यशाला के योगदान की सराहना की।

प्रधानमंत्री ने आर्य वैद्यशाला के संस्थापक वैद्यरत्नम पी. एस. वरियर को स्मरण करते हुए कहा कि उनका आयुर्वेद के प्रति दृष्टिकोण और लोक कल्याण के प्रति समर्पण आज भी चिकित्सा जगत के लिए प्रेरणास्रोत है।

पीएम मोदी ने कहा कि आर्य वैद्यशाला भारत की उस प्राचीन उपचार परंपरा का प्रतीक है, जिसने सदियों से मानवता की सेवा की है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद किसी एक काल या क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि हर युग में इस चिकित्सा पद्धति ने जीवन, संतुलन और प्रकृति के साथ सामंजस्य का मार्ग दिखाया है।

प्रधानमंत्री ने बताया कि आज आर्य वैद्यशाला 600 से अधिक आयुर्वेदिक औषधियों का निर्माण कर रही है। संस्था के अस्पताल देश के विभिन्न हिस्सों में आयुर्वेदिक पद्धति से उपचार प्रदान कर रहे हैं, जहां 60 से अधिक देशों से मरीज इलाज के लिए आते हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि आर्य वैद्यशाला ने अपने सेवा भाव से जनता का विश्वास अर्जित किया है। जब लोग पीड़ा में होते हैं, तब यह संस्था उनके लिए आशा का केंद्र बनती है। उन्होंने अस्पताल से जुड़े वैद्य, डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और कर्मचारियों के समर्पण की सराहना की।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने सरकार की नीतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले 10–11 वर्षों में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को लेकर सरकार की सोच में व्यापक बदलाव आया है। आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी, सिद्ध और योग को एकीकृत कर आयुष मंत्रालय की स्थापना की गई।

प्रधानमंत्री ने बताया कि नेशनल आयुष मिशन के तहत देशभर में 12,000 से अधिक आयुष वेलनेस सेंटर्स खोले गए हैं। आयुष विनिर्माण और निर्यात क्षेत्र में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2014 में जहां आयुष उत्पादों का निर्यात लगभग 3,000 करोड़ रुपये था, वहीं अब यह बढ़कर 6,500 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है, जिससे किसानों को भी सीधा लाभ मिल रहा है।

पीएम मोदी ने आयुर्वेद में एविडेंस-बेस्ड रिसर्च की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग से आयुर्वेद को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।