ऋषिकेश | देहरादून
ऋषिकेश के बापूग्राम क्षेत्र में स्थित भूमियाल देवता मंदिर के समीप रविवार को बापूग्राम बचाओ संघर्ष समिति की ओर से एक विशाल जनसभा का आयोजन किया गया। इस जनसभा में बापूग्राम, बीसबीघा, मीरानगर, गीतानगर सहित आसपास के इलाकों से सैकड़ों लोग एकजुट हुए और अपने घर-जमीन को बचाने की आवाज बुलंद की।
सभा का मुख्य मुद्दा वन भूमि प्रकरण रहा। जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2006 में पारित वन अधिकार अधिनियम (Forest Rights Act) का उद्देश्य यह था कि पीढ़ियों से वन भूमि पर रह रहे लोगों को अपराधी न मानकर उन्हें मालिकाना हक दिया जाए।
लेकिन उत्तराखंड में इस कानून की भावना के विपरीत कार्रवाई की जा रही है। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि बापूग्राम, पशुलोक और शिवाजी नगर जैसे क्षेत्र वर्ष 1947 से बसे हुए हैं, जो वन संरक्षण अधिनियम 1980 से भी कई दशक पहले का समय है। इसके बावजूद आज तक न तो यहां वन अधिकारों की प्रक्रिया शुरू की गई और न ही इन आबादी वाले इलाकों को डी-नोटिफाई कर राजस्व ग्राम घोषित किया गया।
जनसभा में मांग की गई कि 75 वर्षों से बसे पक्के मकानों, स्कूलों और बाजारों पर वन कानून लागू करना पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। सरकार को तत्काल इन क्षेत्रों को वन कानूनों से बाहर कर राजस्व ग्राम का दर्जा देना चाहिए।



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