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post authorAdmin 14 Jan 2026

मीठे पेय और शराब पर टैक्स बढ़ाने की WHO की अपील, बच्चों-युवाओं की सेहत पर खतरे की चेतावनी.

विश्व स्वास्थ्य संगठन World Health Organization (WHO) ने दुनिया भर की सरकारों से अपील की है कि वे मीठे पेय पदार्थों, फ्रूट जूस और शराब पर टैक्स बढ़ाएं। संगठन का कहना है कि इन उत्पादों का बढ़ता और सस्ता सेवन मोटापा, डायबिटीज, हृदय रोग, कैंसर और सड़क दुर्घटनाओं जैसी गंभीर बीमारियों को बढ़ावा दे रहा है, जिसका सबसे अधिक असर बच्चों और युवाओं पर पड़ रहा है।

WHO की दो नई वैश्विक रिपोर्टों के मुताबिक, अधिकांश देशों में टैक्स नीति कमजोर होने के कारण मीठे पेय और शराब समय के साथ सस्ते होते जा रहे हैं। नतीजतन, इनका सेवन तेजी से बढ़ा है और स्वास्थ्य व्यवस्था पर बोझ लगातार बढ़ रहा है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया के 100 से अधिक देशों में सोडा जैसे मीठे पेय पर टैक्स लगाया जाता है, लेकिन 100 प्रतिशत फ्रूट जूस, मीठे दूध वाले ड्रिंक और रेडी-टू-ड्रिंक कॉफी-चाय जैसे हाई-शुगर उत्पाद अक्सर टैक्स के दायरे से बाहर रहते हैं। औसतन, एक मीठे सोडा की कीमत में टैक्स की हिस्सेदारी केवल 2 प्रतिशत ही होती है।

WHO का कहना है कि बहुत कम देश महंगाई के अनुरूप टैक्स बढ़ाते हैं, जिससे ये हानिकारक उत्पाद और भी किफायती बनते जा रहे हैं। इससे कंपनियों को अरबों डॉलर का मुनाफा हो रहा है, जबकि बीमारियों का आर्थिक और सामाजिक बोझ समाज को उठाना पड़ रहा है।

WHO के महानिदेशक Tedros Adhanom Ghebreyesus ने कहा कि हेल्थ टैक्स बीमारियों की रोकथाम का सबसे प्रभावी उपाय है और इससे सरकारों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आवश्यक संसाधन भी उपलब्ध हो सकते हैं।

एक अन्य रिपोर्ट में बताया गया है कि 2022 के बाद से अधिकांश देशों में शराब की कीमतें या तो घटी हैं या स्थिर बनी हुई हैं, जबकि इसके खतरे स्पष्ट हैं। दुनिया के 167 देश शराब पर टैक्स लगाते हैं, वहीं 12 देशों में शराब पूरी तरह प्रतिबंधित है।

WHO ने चेतावनी दी है कि शराब सस्ती होने से हिंसा, चोट और बीमारियां बढ़ती हैं, जबकि लाभ कंपनियों को और नुकसान समाज को उठाना पड़ता है। संगठन ने देशों से अपील की है कि वे 2035 तक तंबाकू, शराब और मीठे पेय पदार्थों की कीमतें बढ़ाने के लिए टैक्स सिस्टम को मजबूत करें, ताकि ये धीरे-धीरे कम किफायती बनें और लोगों की सेहत सुरक्षित रह सके।