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post authorAdmin 22 Dec 2025

पुरानी गढ़वाली रचनाओं का हिन्दी अनुवाद हो : नरेन्द्र सिंह नेगी.

देहरादून। गढ़वाली लोकसंस्कृति के पुरोधा, वरिष्ठ कवि और लोकगायक नरेन्द्र सिंह नेगी ने पुरानी गढ़वाली रचनाओं के हिन्दी अनुवाद की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि गढ़वाल क्षेत्र के जो लेखक हिन्दी में लेखन कर रहे हैं, उन्हें पुराने गढ़वाली साहित्यकारों की रचनाओं का हिन्दी में अनुवाद करना चाहिए, ताकि यह समृद्ध साहित्य नई पीढ़ी तक पहुंचे और पुनर्जीवित हो सके।

श्री नेगी यह बात प्रख्यात ऊर्जा वैज्ञानिक, कवि और लेखक डॉ. ईशान पुरोहित के काव्य संग्रह “तुम्हारे बाद भी” तथा संस्मरण संग्रह “सफर, मुस्कुराहट और जिंदगी” के लोकार्पण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कही। यह कार्यक्रम देहरादून के नत्थनपुर स्थित एक बैंक्विट हॉल में आयोजित किया गया, जिसका संयुक्त आयोजन सुशीला देवी फेलोशिप प्रोग्राम और विनसर पब्लिशिंग कंपनी ने किया।