उत्तराखंड कैबिनेट ने टाउन प्लानिंग स्कीम (टीपीएस) को मंजूरी दे दी है। इस निर्णय के बाद राज्य में नए शहरों के विकास का मार्ग आसान होगा और भूमि अधिग्रहण से जुड़े विवाद कम होने की उम्मीद है। योजना के तहत जहाँ शहर बसेंगे, वहाँ की विकसित भूमि भूमि-मालिकों को वापस मिलेगी।
गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान और कर्नाटक में टीपीएस मॉडल ने शहरीकरण को गति दी है। गुजरात के अहमदाबाद और सूरत की 90–95% शहरी भूमि इसी योजना से विकसित हुई है। महाराष्ट्र में नैना और पुणे मेट्रोपॉलिटन रीजन भी टीपीएस के माध्यम से विकसित हुए हैं। इन राज्यों में टीपीएस ने विनिर्माण, निर्माण और रियल एस्टेट सेक्टर को मजबूत किया है, जो जीएसडीपी में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
योजना के तहत सड़क, जल निकासी, बिजली, पार्क, सार्वजनिक सुविधाएँ और सामाजिक सेवाएँ एकीकृत रूप से विकसित होंगी। खास बात यह है कि भूमि का जबरन अधिग्रहण नहीं होगा। परियोजना शून्य-बजट मॉडल पर आधारित है, जिससे राज्य पर प्रत्यक्ष वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। लागत की वसूली बेटरमेंट चार्ज के माध्यम से की जाएगी। जनसुनवाई और सहभागिता आधारित मॉडल से योजनाओं को लागू किया जाएगा।
प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने कहा कि इस मॉडल से भूमि अधिग्रहण विवाद कम होंगे और आवास, व्यापार व उद्योग के लिए पर्याप्त शहरी भूमि उपलब्ध हो सकेगी।
टीपीएस के तीन चरण
पहला चरण
– टीपीएस क्षेत्र की पहचान
– ड्राफ्ट तैयार करने का इरादा घोषित
– टाउन प्लानिंग ऑफिसर की नियुक्ति
– सार्वजनिक सुझाव आमंत्रण
– ड्राफ्ट टीपीएस तैयार
दूसरा चरण
– ड्राफ्ट टीपीएस का प्रकाशन
– आपत्तियों व सुझावों का आमंत्रण
– प्राधिकरण द्वारा स्वीकृति
– फिजिकल व फाइनेंशियल टीपीएस तैयार
– हाई-पावर्ड कमेटी से अंतिम मंजूरी
अंतिम चरण
– भूमि-मालिकों को लेटर ऑफ अवॉर्ड और सर्टिफिकेट ऑफ ऑनरशिप जारी
– पुनर्गठित प्लॉट का कब्जा सौंपना
– कन्वेंस डीड जारी कर भूमि रिकॉर्ड अपडेट
– अंतिम टीपीएस लागू



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