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post authorAdmin 10 Dec 2025

फर्जी प्रमाण पत्र मामले में दिव्यांग शिक्षकों की मेडिकल बोर्ड से दोबारा जांच होगी.

शिक्षा विभाग में दिव्यांगता के फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्ति पाने के मामले में कार्रवाई तेज हो गई है। विभाग अब 51 शिक्षकों के दिव्यांगता प्रमाण पत्रों की मेडिकल बोर्ड से दोबारा जांच कराएगा।

शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि जांच प्रक्रिया शुरू करने से पहले सभी शिक्षकों से शपथ पत्र लिया जाएगा। इसके बाद मेडिकल बोर्ड गठित कर प्रमाण पत्रों की सत्यता जांची जाएगी।

विभाग ने पहले ही इन शिक्षकों को नोटिस जारी कर निदेशालय में प्रमाण पत्रों सहित उपस्थित होने के लिए कहा है। शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती के अनुसार कई शिक्षक निदेशालय पहुँचे और अपने प्रमाण पत्रों को सही बताया। उन्होंने कहा कि बिना उचित मेडिकल जांच के किसी भी शिक्षक पर सीधे कार्रवाई नहीं की जा सकती।

वर्ष 2022 में राज्य मेडिकल बोर्ड ने कुछ शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच की थी, जिसमें कई प्रमाण पत्र संदिग्ध पाए गए थे।

यह मामला तब सामने आया जब नेशनल फेडरेशन ऑफ द ब्लाइंड ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की। उसी के बाद मेडिकल बोर्ड से जांच कराई गई थी। हाल ही में शासन ने भी एक समिति गठित कर पूरे प्रकरण की दोबारा समीक्षा शुरू की है।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि नई जांच में जिन शिक्षकों के प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।