भारत और रूस वैश्विक व्यापार के नए मार्ग तैयार कर रहे हैं। 4 और 5 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बैठक में तीन महत्वपूर्ण आर्थिक संपर्क परियोजनाओं—अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC), चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री मार्ग, और उत्तरी समुद्री मार्ग—को गति देने का निर्णय लिया गया।
इन परियोजनाओं के माध्यम से भारत से रूस और मध्य एशिया तक माल पहुँचाने में लगने वाला समय 40 दिनों तक कम हो सकता है। INSTC के पूर्ण संचालन से मुंबई/न्हावा शेवा से सेंट पीटर्सबर्ग तक का समय लगभग आधा रह जाएगा।
रिपोर्ट्स के अनुसार, INSTC में ईरान के रश्त-अस्तारा रेल लिंक का निर्माण तेज़ी से जारी है। मार्च 2025 से भारत मुंद्रा बंदरगाह से ईरान के बंदर अब्बास होते हुए मध्य एशिया तक माल भेज रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मार्ग भारत के व्यापार विविधीकरण को बढ़ावा देगा और खनिज आपूर्ति सुरक्षा को मजबूत करेगा।
नवंबर 2025 में इस कॉरिडोर से पहली बार मालगाड़ी मध्य एशिया से ईरान पहुँची, जिसने रिकॉर्ड समय में यात्रा पूरी की। 5 दिसंबर को नई दिल्ली में मोदी-पुतिन वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि दोनों पक्ष स्थिर और कुशल परिवहन कॉरिडोर विकसित करने पर सहमत हुए हैं।
चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री मार्ग पर भी प्रगति हुई है। यह मार्ग दूरी को लगभग 8,000 किलोमीटर तक कम कर देगा। भारत को इससे रूस के ऊर्जा-समृद्ध क्षेत्रों तक सीधी पहुँच मिलेगी, जबकि रूस के लिए भारत एक विशाल उपभोक्ता बाजार है।
उत्तरी समुद्री मार्ग—जो स्वेज मार्ग से 40% छोटा है—भारत को वर्षभर आर्कटिक LNG, तेल और खनिजों तक पहुँच प्रदान करेगा। रूस ने भारतीय जहाज़ों को आर्कटिक बंदरगाहों और बर्फ तोड़ने वाले जहाज़ों तक प्राथमिकता-आधारित पहुँच देने पर सहमति दी है।
भारत-रूस व्यापार 2024–25 में 65 अरब डॉलर पार कर चुका है और लक्ष्य 2030 तक 100 अरब डॉलर का है। प्रधानमंत्री मोदी ने संकेत दिया कि यह लक्ष्य समय से पहले भी हासिल हो सकता है।
नई दिल्ली से संदेश स्पष्ट है—कौन से देश सुरक्षित, तेज़ और स्थिर व्यापार मार्गों को नियंत्रित करते हैं, वही भविष्य के आर्थिक नेतृत्व को तय करेंगे।



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