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post authorAdmin 10 Nov 2025

उत्तराखंड की बेटी प्रज्ञा जोशी ने थाईलैंड में जीता कांस्य पदक: देश का नाम किया रोशन !.

देहरादून (उत्तराखंड): थाईलैंड में आयोजित वर्ल्ड जुजित्सु चैंपियनशिप 2025 में उत्तराखंड की बेटी प्रज्ञा जोशी ने भारत का नाम गौरव से ऊँचा किया है।

उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया।

देहरादून लौटने पर प्रज्ञा का भव्य स्वागत किया गया, जहां स्थानीय लोगों और खेल प्रेमियों ने उनका उत्साहपूर्वक अभिनंदन किया।

प्रज्ञा जोशी की प्रेरणादायक यात्रा:-

उत्तराखंड के रानीखेत में जन्मी प्रज्ञा जोशी वर्तमान में ऋषिकेश में अपनी मार्शल आर्ट्स अकादमी चला रही हैं।

उन्होंने बताया कि खेल के प्रति अपने जुनून और समर्पण के कारण उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ने का बड़ा फैसला लिया।

उनके अनुसार, वर्ल्ड चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतना उनके 20 साल के कठिन परिश्रम का परिणाम है।

फाइनल मुकाबले के दौरान वियतनाम की खिलाड़ी से भिड़ंत में उनकी आंख पर चोट लग गई, जिसकी वजह से कुछ अंक खोने पड़े।

इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और भारत को 77 देशों के बीच सम्मान दिलाया।

खेल के प्रति जुनून और समर्पण:-

प्रज्ञा ने अपने खेल की शुरुआत कराटे से की थी।

वह 10 बार स्टेट चैंपियन रह चुकी हैं और कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुकी हैं।

उन्होंने उत्तराखंड पुलिस में सेवा दी और अपने उत्कृष्ट कार्य के लिए विशेष सेवा पदक से सम्मानित भी हुईं।

लेकिन खेल के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने उन्हें स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के लिए प्रेरित किया, ताकि वे पूरी तरह से खेल और प्रशिक्षण में जुट सकें।

महिलाओं को आत्मरक्षा सिखा रही हैं प्रज्ञा:-

आज प्रज्ञा जोशी अपनी अकादमी में महिलाओं को सेल्फ डिफेंस और कॉम्बैट गेम्स सिखा रही हैं।

वे विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों की लड़कियों को निशुल्क प्रशिक्षण दे रही हैं।

उनका मानना है कि:-

“हर लड़की को खुद की सुरक्षा के लिए मजबूत बनना जरूरी है, क्योंकि आत्मरक्षा आत्मसम्मान की पहली सीढ़ी है।”

प्रज्ञा बताती हैं कि उन्होंने अपनी पहली मार्शल आर्ट्स ड्रेस अपने पिता से पाई थी, और तभी से उन्होंने खेल में अपना जीवन समर्पित कर दिया।

उनका सपना है कि वे भविष्य में गोल्ड मेडल जीतें और अधिक से अधिक लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाएं

लक्ष्य:अब गोल्ड की ओर:-

प्रज्ञा जोशी का कहना है कि यह कांस्य पदक उनके लिए नई शुरुआत है।

अब उनका अगला लक्ष्य गोल्ड मेडल जीतना है।

वे चाहती हैं कि आने वाले वर्षों में भारत जुजित्सु खेल में शीर्ष स्थान प्राप्त करे और अधिक से अधिक युवाओं को इस दिशा में प्रेरणा मिले।